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आतंकवाद के मामले अदालत में क्यों फुस्स होते हैं?

क्या पुलिस की कार्यप्रणाली गहरी खामियों से भरी है तथा वह अपने राजनीतिक आंकाओं को खुश करने के लिए तबकाविशेष या समुदायविशेष से सम्बधित लोगों को ही फर्जी मुकदमे में बन्द करती है, यह सवाल नए सिरे से विचारणीय हो उठा है। हाल के दिनों में राजधानी दिल्ली से लेकर  >सुभाष गाताड़े


राजनीति के दरिया में डगमगाती कुछ नौकायें
पतवार थामेंगे फिल्मी नायक और नायिकाये !

राजनीति एक ऐसा दरिया है जिसमें राजनैतिक पार्टियों की नौका-दौड़ों की प्रतिस्पर्धाएं चलती रहती है। जब-जब निर्वाचन महोत्सव का मुहूर्त नजदीक आता जाता है, तब-तब प्रतिस्पर्धा में भाग लेने के लिए पार्टियों की नौकायें बहती जलधारा के बीच छोड़ दी जाती हैं। >राजेंद्र जोशी


संघपरिवारी घटकों की पहचान का संकट

जब तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहनसिंह ने नई आर्थिक नीति की घोषणा की थी तब भाजपा संसदों ने यह कह कर उसका परोक्ष समर्थन किया था कि काँग्रेस ने हमारी नीतियाँ 'हाईजैक' कर ली हैं। गत दिनों नई आर्थिक नीतियों के साथ आयी पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित युवाओं की पार्टी पर भाजपा शासित कर्नाटक के मंगलौर >वीरेंद्र जैन


आखिर कब चेतेंगे हम

बाघों को बचाने के लिए कागजी और जुबानी तौर पर जितना काम किया जाता रहा है. अगर उसका एक प्रतिशत भी हकीकत में किया जाता तो शायद बाघों की घटती संख्या पर अंकुश लगाया जा सकता था. अब तक हमें सुकून था कि सरिस्का जैसे हालात कहीं और नहीं हैं. >नीरज नैयर


राष्ट्रीय अभियानों में शिक्षा

शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए राष्टीय शिक्षा अभियान अब हमारे यहां परंपरा बनते चले जा रहे हैं जिनमें शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के उपाय रुढ़ होकर लगातार जड़ता को प्राप्त होते जा रहें हैं। शिक्षा के इन राष्टीय अभियानों से कोई सबक लेने की बजाय केन्द्र सरकार ने सन् 2020 तक देश के सभी बालकों को माध्यमिक स्तर तक शिक्षा  >प्रमोद भार्गव


''ग्रामीण बेरोजगारी-
कारण में छिपा निवारण''

भारत गांवों का देश है, इसकी लगभग दो-तिहाई आबादी गांवों में निवास करती है, अत: ग्रामीण क्षेत्रों का जीवन स्तर उठाए बिना राष्ट्र का विकसित होना असंभव है। आज भारत विश्व में मज़बूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभरा है। भारत में औद्योगिक उत्पादन दर तथा आर्थिक विकास दर  >स्वाति शर्मा


कृषि लागत बढ़ने से परेशान किसान

अभी होशंगाबाद जिले के कुछ किसानों ने मुझे बताया कि खेती उनके लिए बेगारी बन गई हैं, क्योंकि खेती की बढ़ती लागत और घटती उपज से यह घाटे का सौदा बन गया है। एक किसान रमेश भाई, ने बताया गया है कि बिजली की बेतहाशा कटौती ने उनका घाटा और ज्यादा बढ़ा दिया है।एक हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की लागत का ब्यौरा उन्होंने कुछ इस तरह दिया,  गेहूं में तीन सिंचाई >डॉ.सुनील शर्मा


नदियों के संरक्षण के लिए
जल नीति बनाना चाहिए

''प्रत्येक राज्य को नदियों और अन्य जल स्त्रोतों के संरक्षण के लिए जल नीति बनानी चाहिए। इस तरह की जलनीति कुछ राज्यों ने बना ली है, परंतु कई राज्यों ने अभी तक नहीं बनाई है। मध्यप्रदेश उन राज्यों में है जिन्होंने अभी तक यह नीति नहीं बनाई है।'' यह विचार जल नीति की आवश्यकता प्रतिपादित करते हुए जल संरक्षण के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित राजेंद्र सिंह ने व्यक्त किए। >एल.एस.हरदेनिया


आर्थिक मंदी के अंधकार में
ओबामा का उदय

विगत कुछ समय से अमेरिका भीषण आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। जिसके परिणामस्वरूप एक तरफ व्यापार में घाटा बढ़ता ही जा रहा है साथ ही शेयर मार्केट लगातार गिरावट की मार झेल रहा है ? दूसरी ओर बेकारी का बढ़ता ग्राफ सबको चिंतित कर रहा है ? अमेरिकी अर्थ व्यवस्था ने वैश्विक वित्त संकट  >डॉ. राजश्री रावत ''राज''


दलित-उत्पीड़न पर विराम कब लगेगा ?

भारत की आज़ादी के छ: दशक बीत चुके हैं। भारतीय संविधान की उम्र भी लगभग इतनी ही हैं। परन्तु यह दु:खद बात है कि देश में अद्य पर्यन्त संविधान प्रदत्त नागरिक अधिकार सबको समान रूप से प्राप्त नहीं है। विशेष रूप से दलितों की स्वतन्त्रता और समानता के अधिकारों का हनन संविधान की मूल भावना के विपरीत है। >डॉ. गीता गुप्त


09फरवरी2009

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