संस्करण: 08 मार्च-2010  

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महंगाई को लेकर बवाल क्यों ?

  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रशंसा की जाना चाहिए कि उन्होंने पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्यवृद्धि वापस लेने से इंकार कर दिया। संप्रग के कुछ सहयोगी दल और विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। संयुक्त विपक्ष तो संसद का>महेश बाग़ी


 

बेतालों की
शव साधना


राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबधंन के अध्यक्ष के तौर पर पूर्वप्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी को एक बार पुन: चुन लिया गया है। उन वाजपेयी को,जो न सिर्फ शारीरिक तौर पर काफी अस्वस्थ हैं, बल्कि जिनकी स्मरण-शक्ति भी>सुनील अमर


 

अमरसिंह का आजमगढ जमावड़ा
यह पूंजी के दरबार में क्रीतदासों का मिलन स्थल था


बर है कि राजनीति में राजनीतिज्ञों और धनपतियों के बीच फिल्मस्टारों के माध्यम से मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले अमर सिंह ने आजमगढ में बड़ी रैली  कर डाली है और उस रैली में पच्चीस हजार लोगों की>वीरेंद्र जैन


 

जोखिम में मानवाधिकारों
की हिमायत !


मुंबई पत्रकार संघ का सभागार उस शाम वक्त से पहले ही भर गया था (18 फरवरी 2010) जिसमें विद्यार्थियों से लेकर वकालत के पेशे से जुड़ी बम्बई की तमाम नामीगिरामी हस्तियों तक, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से लेकर>सुभाष गाताड़े


 

सत्ता हथियाना ही राजनैतिक दलों का लक्ष्य
भाषणों के महाकुंभ हैं अधिवेशन और सम्मेलन


   कतंत्र में चारों तरफ राजनीति ही राजनीति का माहौल बना रहना स्वाभाविक है। विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका यहां तक कि खबरपालिका भी राजनीति के प्रभाव या दुष्प्रभाव से अछूती नहीं हैं।>राजेंद्र जोशी


 

जिंदे गांव का स्वाभिमान मर रहा है।

ज पुरी दुनिया के लोग केवल दो रोटी की चिंता में इतने स्वार्थी हो गए हैं कि चाहे पृथ्वी मिट जाए या दुनिया में हाहाकार भी मच जाए तो उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं है। पर्यावरण और जलवायु के संरक्षण को लेकर हुआ>डॉ मृत्युंजय जोशी


 

हिन्दू समागम : भागवत ने भारत के नागरिक की नई परिभाषा दी

पाल में दिनांक 28 फरवरी 2010 को आयोजित हिन्दू समागम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक डा मोहन भागवत ने अपने उदबोधन के दौरान जो विचार प्रगट किए, उनसे देश की एकता कमजोर होगी।>एल एस हरदेनिया


 

 

बेरोजगारी बढ़ाता खदान माफिया

 ध्यप्रदेश में खदान माफिया रोजगार का संकट बढ़ाने का काम सुनियोजित ढंग से कर रहा है। पत्थर व अन्य खनिज खदानों से उत्खनन के अनुबंध के लिए जो विज्ञापन जारी हो रहे हैं, उनकी भाषा और शर्तें ऐसी हैं कि उसकी>प्रमोद भार्गव


 

आधी दुनिया की सुरक्षा बिना कैसा विकास

      र्थिक, वैज्ञानिक, सैनिक उपलब्धियों के बल पर भारत समृद्व, शौर्यवान व खुशहाल राष्ट्र बन पाया है। देश की सुरक्षा, बहुरंगी संस्कॄति और बेमिसाल प्रगति के लिए अनगिनत वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दे डाली>राखी रघुवंशी


 

समावेशी विकास की ओर
बढ़ते कदम


 ई 2009 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दोबारा सत्ता संभालते ही समावेशी विकास की बात कही थी।समावेशी विकास से तात्पर्य उस विकास है जिसमें उन लोगों और क्षेत्रों को शामिल किया जाए जो अब तक>डॉ सुनील शर्मा


 

15 मार्च : विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस पर विशेष
जागो ! ग्राहक, जागो !!


      क्कीसवीं सदी आर्थिक उदारीकरण और वैश्वीकरण का युग है। इसमें बाज़ारवादी संस्कृति और उपभोक्तावाद को निरंतर प्रोत्साहन मिल रहा है। समूचा विश्व मानों एक बाजार में परिवर्तित हो गया है। मगर इस बाज़ार को अपने>डॉ ग़ीता गुप्त


08 मार्च-2010

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