संस्करण: 08जून-2009

 

भाजपा के राज में कर्तव्य परायण
अधिकारी भी दंडित किए जाते हैं
 

एल.एस.हरदेनिया

देवास की डिप्टी कलेक्टर संजना जैन को रातों-रात जिस अशोभनीय ढंग़ से हटाया गया उसकी न सिर्फ प्रशासनिक हलकों में बल्कि आम लोगों में भी प्रतिकूल प्रतिक्रिया हुई है। संजना जैन को इसलिए हटाया गया क्योंकि वे ईमानदारी से शासन के आदेश का पालन कर रही थीं। उन्हें इसलिए हटाया गया क्योंकि राज्य मंत्रिपरिषद के एक सदस्य एवं देवास के पूर्व राजा तुकोजीराव पवार उनसे खफा हो गए थे। सामंती मिजाज के अनुरूप उन्होंने मांग की कि संजना जैन को तुरंत देवास से रूखस्त करो और अफसोस की बात यह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ''राजा'' पवार के आदेशों का अक्षरश: पालन करते हुए संजना जैन को तुरंत देवास छोड़कर भोपाल आने का आदेश दिया। आखिर संजना जैन का अपराधा क्या था?

उनका अपराधा मात्र इतना था कि वे एक ऐसे अभियान का नेतृत्व कर रही थीं जिसका उत्तरदायित्व कलेक्टर ने उन्हें सौंपा था। कुछ दिन पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन देवास प्रवास पर थे। उनके प्रवास के दौरान अनेक नागरिकों ने यह शिकायत की कि नगर में गरीबों के हिस्से के घासलेट की धाड़ल्ले से कालाबाजारी हो रही है। साथ ही सिंथेटिक मावा और नकली खाद्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं। इस पर बिसेन ने कलेक्टर को निर्देश दिया कि इस तरह की आपराधिक गतिविधियों में लिप्त व्यापारियों के विरूध्द कार्यवाही की जाए। तदानुसार कलेक्टर ने इस अभियान के लिए एक टीम बनाई और इस टीम का नेतृत्व दबंग अधिकारी संजना जैन को सौंपा। अभियान के दौरान संजना ने एक ऐसे रेस्टोरेंट पर छापा मारा जो एक भाजपा कार्यकर्ता का था। छापे के दौरान उस रेस्टोरेंट में अनेक अनियमितताएं पाई गईं। टीम ने कुछ खाद्य पदार्थों के सेम्पल लिए। रेस्टोरेंट में दो घरेलू गैस सिलेन्डर पाए गए। रेस्टोरेंट मालिक दिनेश गुप्ता ने पहले तो अभियान में बाधा डाली। उसके साथ ही उसने मंत्री तुकोजीराव पवार से शिकायत की। पवार आनन-फानन में अपने समर्थकों के साथ रेस्टोरेंट पहुंच गए। वैसे अदालत को दिए गए एक आवेदन के अनुसार उन्हें उस दिन देवास में नहीं होना था। परन्तु वे इस बात को भूल गए और अपने समर्थक पार्टी कार्यकर्ता की रक्षा के लिए दौड़ पड़े। स्पष्ट है उन्होंने अपनी नाराजगी मुख्यमंत्री तक पहुंचाई। उसके बाद संजना जैन को आदेश दिया गया कि वे फौरन देवास छोड़ दें।

जिस ढ़ंग से संजना का स्थानांतरण किया गया उससे एक स्पष्ट संदेश उन अधिकारियों तक पहुंचा गया है कि यदि तुम भाजपा के कार्यकर्ताओं के साथ छेड़खानी करोगे तो तुम्हें उसी तरह की स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए जिसमें संजना जैन ने अपने आप को पाया। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से यह बता दिया गया है कि तुम्हें हमारे आदेशों, नीतियों और कार्यक्रमों पर अमल तो करना है परंतु इस तरह से जिससे हमारे कार्यकर्ताओं का नुकसान न हो। यदि आपको लगता है कि भाजपा का कोई कार्यकर्ता कानून का उल्लघंन कर रहा है तो उसे ऐसा करने दो। यदि वह जहरीला मावा बेच रहा हो तो बेचने दो, केवल घरेलू उपयोग के लिए रियायती दर पर बेचे जाने वाले गैस सिलिन्डरों का उपयोग जलेबी, भजिए बनाकर बेचने के लिए कर रहा हो तो करने दो। हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं को हर प्रकार का अपराधा करने का मूलभूत अधिकार है, नियम-कानून गैर-भाजपाईयों के लिए हैं।

प्रजातंत्र में मुख्यमंत्री का प्रमुख कर्तव्य अपनी पार्टी एवं पार्टीजनों के हितों की रक्षा करना है, आखिर उनके परिश्रम, प्रतिबध्दता और समर्पण भाव से किए गए प्रयासों से ही तो मुख्यमंत्री और मंत्री चुनाव की वैतरणी पार करते हैं!

इस मामले में जो चूक हुई है वह मुख्य सचिव से हुई है। जहां मुख्यमंत्री अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के संरक्षक हैं वहीं मुख्य सचिव शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के संरक्षक हैं। इस मामले में मुख्य सचिव संरक्षक की भूमिका निभाने में असफल रहे हैं। जब मुख्यमंत्री ने संजना जैन को स्थानांतरित करने का आदेश दिया था उस समय मुख्य सचिव को स्पष्ट कर देना था कि इस तरह का आदेश इस समय जारी नहीं किया जा सकता क्योंकि यदि ऐसा किया जाता है तो इससे अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल गिरेगा और अधिकारियों और कर्मचारियों की ऐसी टीम से जिसका मनोबल गिरा हुआ हो सरकारी नीतियों पर ठीक से अमल कर पाने की उम्मीद नहीं की जा सकती। उनका कर्तव्य था कि वे इस आदेश को जारी होने से रूकवाते। मुझे ऐसे कई उदाहरण याद हैं जब मुख्य सचिवों के हस्तक्षेप से मुख्यमंत्री या मंत्रियों के इस तरह के आदेशों का जारी होना रोका गया है।

मुख्य सचिवों के हस्तक्षेप से क्या करिश्मा हो सकता है इसका एक वाकया याद आता है। स्वर्गीय श्री रामसिंह खन्ना, विक्रय कर आयुक्त थे। उन्होंने विक्रय कर की वसूली के लिए विशेष अभियान चलाया था। यह अभियान उन व्यापारियों को रास नहीं आया जो विक्रय कर की चोरी करते थे। इस श्रेणी के व्यापारियों ने इंदौर के एक मंत्री पर दबाव बनाया कि वे खन्ना को किसी प्रकार से दंडित करवाएं। इस मंत्री ने तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री पीसी सेठी को खन्ना के निलंबन के लिए सहमत करवा लिया। एक सोची-समझी योजना के अनुसार यह कार्य रविवार को करवाया गया। उस समय स्वर्गीय श्री आरसीव्हीपी नरोन्हा मुख्य सचिव थे। यह सभी को मालूम था कि नरोन्हा रविवार को शासकीय कार्य नहीं करते थे। विशेष रूप से आयोजित एक पत्रकार वार्ता में खन्ना के निलंबन की घोषणा की गई। अनेक पत्रकारों को इस मामले में दाल में काला नजर आया। मैं स्वयं उस समय अंग्रेजी दैनिक ''हितवाद'' का विशेष संवाददाता था। इस बात को जानते हुए कि नरोन्हा घर पर नहीं होंगे मैंने उनके निवास पर फोन किया। मैंने श्रीमती नरोन्हा से कहा कि विक्रय कर आयुक्त आरएस खन्ना का निलंबन कर दिया गया है। शाम को वापिस आने पर नरोन्हा साहब से बात हुई। मै ने उन्हें खन्ना के निलंबन की खबर दी। इस पर उन्होंने कहा कि मेरी अनुमति के बिना इतने वरिष्ठ अधिकारी का निलंबन कैसे हो सकता है। इस पर मैंने उनसे जानना चाहा कि मैं अपने समाचार पत्र में इस खबर को किस तरह प्रकाशित करूं। उन्होंने परामर्श दिया कि आप लिखा "R. S. Khanna not suspended" अर्थात ''आरएस खन्ना का निलंबन नहीं हुआ है।'' कुछ समय बाद खन्ना के निलंबन का आदेश वापिस ले लिया गया। नरोन्हा का निर्णय उनके अदम्य साहस का प्रतीक था। परन्तु उन्होंने यह साहस एक ऐसे अधिकारी की रक्षा की खातिर उठाया जो राज्य के हित में एक विशेष अभियान चला रहा था। यदि विक्रय कर की वसूली बढ़ती तो इसका फायदा राज्य और राज्य की जनता को होता। अपेक्षा यह थी कि वर्तमान मुख्य सचिव श्री राकेश साहनी भी इस तरह का साहस दिखाते। संजना जैन जो कुछ कर रही थीं वह भी तो राज्य और राज्य की जनता के हित में था।

देवास में पेयजल का भारी अभाव है। पानी के अभाव से गंदगी फैलती है और गंदगी संक्रामक बीमारियों का कारण बन सकती है। ऐसी स्थिति में यदि कोई रेस्टोरेंट दूषित खाद्य पदार्थ बेचता है तो उससे संक्रामक रोग फैलने की प्रबल संभावना रहती है। इस स्थिति में प्रशासनिक अमले का संरक्षक होने के नाते उन्हें संजना जैन की रक्षा करनी थी। इसी तरह मुख्यमंत्री से भी अपेक्षा थी कि वे अपने पार्टी जनों के दबाव में आकर ऐसा कदम न उठावें जिससे प्रशासनिक मशीनरी का मनोबल गिरे। किसी भी मुख्यमंत्री को अपनी पार्टी के द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रमों को प्रशासनिक मशीनरी के माधयम से ही क्रियान्वित करवाना होता है। ज्योति बसु इस देश के सफलतम मुख्य मंत्री रहे हैं। इतने लंबे समय तक कोई भी नेता मुख्यमंत्री नहीं रहा। एक बार ज्योति बसु से मेरी मुलाकात हुई थी। अवसर था पत्रकारों के सम्मेलन का जो दुर्गापुर में आयोजित था। ज्योति बसु से प्रश्न पूछा गया था ''आपके प्रशासन के सफल संचालन का रहस्य क्या है?'' उनका उत्तर था ''प्रशासनिक अधिकारियों को फ्री हेन्ड देना। '' उन्होंने इसका एक उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि ''मैं एक दिन एक जिला मुख्यालय में गया हुआ था। वहां पहुंचने पर मुझे उस जिले की कलेक्टर, जो महिला थीं, ने बताया कि सर मुझे किन्हीं कारणों से आपकी पार्टी के विधायक को गिरतार करना पड़ा। इस पर मैंने उनसे कहा कि आपने ठीक ही किया होगा। '' ज्योति बसु के इसी तरह के रवैये से पश्चिमी बंगाल के अधिकारी उनके आदेशों का पालन करते थे। उन्हें भरोसा था कि यदि कर्तव्य पालन करते हुए उनसे अनजाने में कुछ गलती भी हो जाएगी तो उन्हें दंडित नहीं किया जाएगा, भले ही उस गलती से सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों का अहित होता हो। संजना के मामले में इस तरह की संजीदगी नहीं दिखाई गई।


एल.एस.हरदेनिया