संस्करण: 08दिसम्बर-2008

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सबक सीखने की महती आवश्यकता है

प्रत्येक राष्ट्र व समाज कभी न कभी मुसीबत के दौर से गुजरता है। महान हम उस राष्ट्र व समाज को कहते हैं जो अपनी मुसीबतों से  सबक सीखता है। मुंबई में जो कुछ हुआ, वह एक असाधारण दु:खद घटना थी।  >एल.एस.हरदेनिया


पाकिस्तान पर भरोसा व अमेरिकी बैशाखी छोड़े

पाकिस्तान के अड़ियल रूख से चिंतित व खिन्न अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलिजा राइस की चेतावनी फिर बेअसर सिध्द हुआ। तभी तो राष्ट्रपति जरदारी ने लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज मोहम्मद सहित 20 भगोड़े आतंकी को भारत सौंपने से इनकार कर दिया। आतंकी हमले में शहादत हो गईं पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो >अंजनी कुमार झा


आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब

मुंबई में आतंकवादी हमले के बाद केन्द्र सरकार गंभीर हो गई है और उसने सख्त कदम उठाना शुरू भी कर दिए हैं। शिवराज पाटील की केन्द्रीय गृहमंत्री और विलास राव देशमुख तथा आर.आर. पाटील की महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री और गृहमंत्री पद से छुट्टी कर दी गई है।  >महेश बाग़ी


चेहरा बदल रहा है आतंकवाद!

आतंकवादियों के बुलंद हौसलों ने एक बार फिर देश की कानून व्यवस्था पर एक सवालिया निशान लगा दिया है। इस बार आतंकवादियों ने समुद्री मार्ग से आकर देश की आर्थिक राजधानी पर हमला बोला है। मुम्बई पुलिस को कई सूत्रों से इस हमले की जानकारी मिल >डॉ. महेश परिमल


अब रोकना ही होगा : आतंकवाद

26 नवम्बर, 2008 को मुट्ठी भर आतंकवादियों ने समुद्री मार्ग से मुम्बई में प्रवेश करके कहर बरपा दिया। यह हमारी आन्तरिक सुरक्षा व्यवस्था पर करारा तमाचा है। भारत की आर्थिक राजधानी मुम्बई की शान माने जाने वाले होटलों-ताज, ओबेरॉय और नरीमन हाउस में सुनियोजित ढंग से पहुँचने वाले आतंकवादी साठ घण्टों तक ताण्डव मचाते रहे। >डॉ. गीता गुप्त


कहां छिपे थे राज ठाकरे

मुंबई में आतंकवाद की धुंध छटने के बाद हर किसी की जुबान पर बस एक ही नाम है राज ठाकरे. हर कोई बस यही जानना चाहता है कि मराठी हितों की दुहाई देने वाला यह मराठी मानुस आखिर तीन दिनों तक किस बिल में छिपा रहा. जब आतंकवादी मराठियों के खून से >नीरज नैयर


सत्ता हासिल करने की राजनैतिक फितरतें

धर्म, जाति और भाषा को किया जा रहा है गलत ढंग से परिभाषित

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत की एकता अखंडता और चौतरफा समृध्दि के लिए हमारे संविधान निर्माताओं ने देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए जो मंत्र और सूत्र निर्धारित किए थे, वे अब ओझल से होते जा रहे हैं।  >राजेन्द्र जोशी


सन्दर्भ: मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव

वे जनादेश मानेंगीं या गुरू आदेश

विभिन्न संस्थानों के सर्वेक्षणों और समाचार पत्रों को प्राप्त हो रही रिपोर्टों के अनुसार अब इस बात में कोई सन्देह नहीं रह गया है कि मधयप्रदेश में विधानसभा 2008 चुनावों के परिणाम किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं दे रहे हैं व निश्चित रूप से प्रदेश में पहली बार एक मिलीजुली गठबंधन सरकार बनने जा रही है। >वीरेन्द्र जैन


एड्स बनाम दवा कारोबारियों का छल

हमारे देश में एड्स फैलने की जिस तरह से भयावह तस्वीर पेश की जा रही है, वह बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों का सुनियोजित षडयंत्र व देश के आम, गरीब व लाचार नागरिकों से किया जा रहा छल है। और हम हैं कि इसे इस हद तक >प्रमोद भार्गव


छोटे किसानों की बड़ी समस्या

सारी दुनिया में बड़ें भूखंडों पर मशीनी खेती की वकालत काफी लंबे समय से की जा रही है। चाहे पूंजीवादी राजनैतिक व्यवस्था हो या साम्यवादी व्यवस्था इनमें छोटे किसानों को लगातार हतोत्साहित किया गया। पूंजीवादियों में खेती का मालिक एक व्यक्ति या कंपनी >डॉ. सुनील शर्मा


14 दिसंबर-ऊर्जा बचत दिवस पर विशेष

'जैव पदार्थों का अवायवीय किण्वन :

ऊर्जा का एक वैकल्पिक स्रोत'

विश्व के प्रमुख ऊर्जा स्रोत पेट्रोल, डीजल एवं मिट्टी का तेल आदि लगभग समाप्त होने की स्थिति में हैं। आज ऊर्जा का अकाल है, ईंधनों की कीमतें बढ़ती जा रही हैं और पेट्रोलियम उत्पादों की समाप्ति के बाद क्या होगा ? >स्वाति शर्मा


08दिसम्बर2008

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