संस्करण: 06जूलाई-2009

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लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट आते ही
भाजपा की दाढ़ी में तिनका क्यों?
''चोर की दाढ़ी में तिनका'' सदियों पुरानी यह कहावत इस समय भारतीय जनता पार्टी और उन सब पर लागू होती है जो लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट प्रधानमंत्री  को सौंपे जाने के बाद से आक्रामक बयान दे रहे हैं। >एल.एस.हरदेनिया


संदर्भ : लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट
गेंद अब केन्द्र के पाले में
बाबरी मस्ज़िद विधवंस पर जस्टिस लिब्रहान आयोग की बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट 17 साल के लम्बे इंतजार के बाद आखिरकार आ गई है. रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकलकर आये हैं? विधवंस के लिये कौन जिम्मेदार था.>जाहिद खान


माया की मूर्ति से फैली अराजकता
लितों के कंधों पर सवारी कर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमों व उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने सिध्दांतों, वायदे, एजेंडे को दरकिनार कर अराजकता को जगह दी है। जीते जी अपनी मूर्तियां>अंजनी कुमार झा


निष्ठावान प्रशासनिक अधिकारियों का सबसे बड़ा दर्द
राजनैतिक विचारधारा का चिपक जाता है-लेबिल
 से बहुत उदाहरण मिलते हैं जिनमें देखा जाता है कि प्रशासनिक अधिकारीगण अपने उत्तरदायित्वों और कर्तव्यों का निष्ठा, लगन, ईमानदारी और परिश्रम से निर्वहन करते है। ऐसे अधिकारी अपनी सेवा के प्रति प्रतिबध्दता >राजेंद्र जोशी


कितने मोहनदास!
फर्जी जाति प्रमाणपत्रों का अन्तहीन फर्जीवाड़ा!
 

ढ़चिरोली जिले के तुकाराम शंकर गेदम का नाम शायद ही अपने सूबे से बाहर कोई जानता हो ! मगर सूचना के अधिकार कानून का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने जिस तरह फर्जी जाति प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल के जरिए >सुभाष गाताड़े


लोकतंत्र के चौथे खम्भे वालों की सम्पत्ति भी घोषित होनी चाहिये

 रकारी अधिकारियों और कर्मचारियों(कार्यपालिका) के लिए अपनी सम्पत्ति की घोषणा करने का नियम बहुत पहले से ही लागू रहा है पर पिछले कुछ वर्षों के दौरान चुनाव लड़ रहे नेताओं(विधायिका) को अपना उम्मीदवार >वीरेंद्र जैन


नक्सलवाद का स्याह चेहरा
केंद्र सरकार ने माओवादियों पर प्रतिबंध  लगा कर ठीक ही किया है। माओवादियों ने लालगढ़ पर कब्ज़ा कर यही दर्शाया था कि उनका कानून और संविधान में भरोसा नहीं है। ऐसे में इस संगठन पर प्रतिबंध  लगाना समय >महेश बागी


विश्वव्यापी महामंदी में श्री नेहरू की ''मिश्रित अर्थव्यवस्था'' की
अवधारणा ने भारत को आर्थिक विनाश से बचा लिया है।
15 अगस्त 1947 को भारत जब अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ तब भारत के सामने आर्थिक प्रगति की गंभीरतम समस्या थी, यद्यपि देश की आबादी उस समय लगभग 36 करोड़ ही थी किंतु इस सीमित आबादी को भी  >सुरेंद्र जग्गी


इस सच का 'सच' 'राम' जाने
 खुदरा बाज़ार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का मामला एक बार फिर से सुर्खियों में है। जहाँ एक तरफ अप्रत्याशित रूप से जीत कर आई कांग्रेस सरकार ने आरंभ से ही इस क्षेत्र में 26 से 49 फ़ीसदी तक प्रत्यक्ष विदेशी>अशोक कुमार पाण्डेय


स्वास्थ्य के लिए  संकट बनते संकर बीज

नुवंशिक परावधरित बीज स्वास्थ्य के लिए जबरदस्त संकट बनने जा रहे हैं। क्योंकि अब इस तकनीक के जरिये वजूद में लाए गए वर्ण संकर बीजों से फल व सब्जियों के उत्पादन का सिलसिला शुरु होने जा रहा  >प्रमोद भार्गव


11 जुलाई-विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष
जनसंख्या-वृध्दि देश की उन्नति में बाधक
रती पर बढ़ती जनसंख्या विश्व के लिए चिंताजनक है। जब किसी परिवार में एक बच्चे का जन्म होता है तो उनकी जिम्मेदारियां, आवश्यकताएं, परिवार का बजट, घर का पर्यावरण और बहुत कुछ प्रभावित होता है।>ॉ. गीता गुप्त



06 जूलाई  2009

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