संस्करण: 06अप्रेल-2009

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT

एक महान अतीत के लिए संघर्षरत योद्धा
(Fighter for a Great Yesterday)
आडवाणी : रिब्राण्डिंग की मुश्किलें
      जीरे आज़म के तौर पर अपने पांच साला सफर में यह पहली दफा होगा कि डा मनमोहन सिंह ने मुन्तज़िर वजीरे आज़म लालकृष्ण आडवाणी पर सीधा हमला बोला। कांग्रेस पार्टी के चुनावी घोषणापत्र के प्रकाशन के अवसर पर आडवाणी द्वारा बाबरी मस्जिद विधवंस में निभाय' >सुभाष गाताड़े


क्या मजबूत आडवाणी कमजोर मनमोहन सिंह की
बराबरी कर सकते हैं?
        बीजेपी का कहना है कि मनमोहन सिंह कमजोर हैं और उनके लौहपुरुष आडवाणी से उनकी कोई तुलना नहीं। क्या यही सच है? आइये हम उनकी योग्यताओं का परीक्षण करते हैं। 1932 में जन्में मनमोहन सिंह पंजाब यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएट हैं। सेंट जॉन कॉलेज, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से >आकार पटेल


रासुका का उपयोग और  मेनका गाँधी के विचार

          भाजपा की नेता और राजग सरकार में मंत्री रही मेनका गाँधी ने गत दिनों अपने इकलौते पुत्र वरूण गाँधी को भड़काऊ भाषण देने व गिरफ्तारी के समय उत्तेजना फैलाने के बाद रासुका लगाये जाने पर अपने चिवार व्यक्त किये। असल में उस समय वे एक राजनेता के रूप में नहीं।>वीरेंद्र जैना


क्या भारतीय केवल तभी धर्मनिरपेक्ष होते है, जब हमें यह पसंद होता है?

  दिल को दहला देने वाले अंधाकार और हिंसा के ऐसे वक्त में आप गौरव महसूस करने के लिए किसका चुनाव करेंगे- ए.आर. रहमान के करोड़ों में एक 'जय हो' का, जिसने ऑस्कर जीता या फिर उन पठान बंधुओं का, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के >धनंजय महापात्रा


चुनावों में गठबंधन के नए नियम
  देश के राजनेता और विश्लेषक यह स्वीकार करते हैं की अभी काफी समय तक केंद्र में गठबंधान की सरकारें ही बनेंगी. और आज का जैसा माहौल है उसमे सरकार बनाने के लिए जो गठबंधान कारगर  >भवानी शंकर


सत्ता की दौड़ में शामिल हैं- चार मोर्चे, चौबीस प्रधानमंत्री

    लोकसभा निर्वाचन-2009, एक नये ढंग में लड़ा जा रहा है। इस लड़ाई में किसी एक राजनैतिक दल के हाथ में सत्ता की बागड़ोर नहीं आ पायेगी। सभी दलों के अपने-अपने मोर्चें हैं। वह युग बीत गया जब दो दलों में सत्ता संघर्ष होता था। अब यह संघर्ष है मोर्चा के बीच। यू.पी.ए., एन.डी.ए., थर्ड फ्रंट और >राजेंद्र जोशी


टीवी पत्रकारिता की विरोधाभासी मनोदश

      वर्तमान में भारतीय टीवी पत्रकारिता हकीकत दिखाने और झुठलाने की विरोधाभासी अजीबोगरीब मनोदशा से दो-चार हो रही है। एक तरफ वह सीधो प्रसारण ;लाइवध्द के फेर में राष्टहित की भी परवाह न करते हुए मुबंई में हुई कमांडो कारवाई को जस की तस दिखाने में कोई गुरेज  >प्रमोद भार्गव


मतदान अवश्य कीजिए : यह अधिकार ही नहीं-कर्तव्य भी है
        ह भारतीय नागरिकों का सौभाग्य है कि अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति के बाद देश में लोकतंत्र की स्थापना हुई तो यहां के स्त्री-पुरुषों को समान रूप से मतदान का अधिकार प्राप्त हुआ। स्वतंत्र भारत में निर्वाचित लोकतंत्र की गंगा अनवरत् प्रवाहित हो>डॉ.गीता


''ग्रामीण विकास में
योगदान देती सहकारी समितियां''

      र्थिक विकास के विभिन्न साधानों में सहकारिता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। साथ मिलकर काम करने की भावना ही सहकारिता होती है। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में तो सहकारिता की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है। यह बात अलग है कि इस भावना>स्वाति शर्मा


हरित विकास के रास्ते रोजगार
       वैश्विक मंदी का सबस बुरा असर रोजगार पर पड़ा है,पिछले तीन माह के दौरान वैश्विक स्तर पर लगभग सत्तर लाख लोगो का रोजगार छिना है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार इसी रफ्तार से छंटनी जारी रही तो संभावना है कि वर्ष 2009 के आखिर तक लगभग 3 करोड़ लोग >सुनील शर्मा
 



 06अप्रेल2009

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved