संस्करण: 05अक्टूबर-2009

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हुसैन के घर लौटने की लालसा पूरी हो

पिछले दिनों मकबूल फिदा हुसैन ने अपना 94वां जन्मदिवस अपने प्यारे मुंबई में नहीं, बल्कि मैनहट्टन में मनाया। जहां एक नीलामी में उनकी एक पेंटिंग को 5,82,500 डॉलर (लगभग तीन   > दिलीप पड़गांवकर


 

विश्व बैंक से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कर्जा :
समाजकल्याण कार्यक्रमों में कटौती के लिए सुगम होता रास्ता


कोई भी महाजन, कोई भी बैंक जब तक उसे अपना लाभ नज़र न आए तब तक वह अपना पैसा दांव पर नहीं लगा सकता ! प्रश्न उठता है कि भारतीय बैंकों को विश्व बैंक से जो 2 बिलियन डॉलर अर्थात     >सुभाष गाताड़े


 

सार्वजनिक स्थलपर पूजा घर
इस विलंबित महत्वपूर्ण फैसले पर
अमल की तैयारियां क्या हैं?


गत दिनांक 20 सितम्बर 2009 को सुप्रीम कोर्ट की एक बैंच के जस्टिस दलवीर भंडारी और मुकुंदकम शर्मा ने अपने एक फैसले में कहा है कि सार्वजनिक जगहों पर पूजा स्थलों के निर्माण न होने देने को राज्य सरकारें सुनिश्चित >वीरेंद्र जैन


 

पर्यावरण की भी चिंता कीजिए-जनाब

ध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों प्रदेश के औद्योगिकरण पर ध्यान दे रहे हैं। हाल ही में उन्होंने घोषणा की है कि प्रदेश में 11,00 करोड़ के उद्योग लगाएं जाएंगे। पांच-पांच इन्वेस्टर्स मीट पर करोड़ों रुपए        >महेश बाग़ी


 

प्रजातांत्रिक समाज में शस्त्र पूजा का औचित्य नहीं

भोपाल विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रूसिया की रहस्यमय मौत पर से अभी पर्दा पूरी तरह से उठ भी नहीं पाया था कि एक और रहस्यपूर्ण मौत ने भारतीय जनता पार्टी और आरएस >एल.एस.हरदेनिया


 

'सड़ा अचार'- एक अमर्यादित उपमा
सार्वजनिक जीवन में वाणी स्वनियंत्रण जरूरी

 

राजनीति के क्षेत्र का इन दिनों जो सबसे बड़ा संकट है, वह है, नेताओं के बोलचाल आचार-व्यवहार और शालिनता में गिरता जा रहा नैतिकता का ग्राफ। नेताओं का कतिपय नेताओं के प्रति आक्रोश या प्रतिद्वंन्द्वी >राजेंद्र जोशी


अपराध सोनम का, अक्स समाज का !


क ही परिवार के सात लोगों की हत्या परिवार की ही लड़की सोनम तथा उसके प्रेमी द्वारा करने की ख़बर (14 सितम्बर 2009) पर समाज में विचारमंथन चल रहा है। सोनम ने पुलिस को बताया कि उसने  >अंजलि सिन्हा


पत्रकारिता में महिला पत्रकारों
के दरपेश समस्याएं


बीती सदी के आखरी दशक में हमारे मुल्क में नवउदारवादी अर्थव्यवस्था के अमल में आने के बाद एक उपभोक्ता की राजनीति और उपभोक्तावादी संस्कृति का उदय हुआ और इसका सीधा-सीधा असर  >जाहिद खान


गांधी जी का साम्यवाद


वैश्वीकरण के दौर में आज असमानता लगातार बढ़ रही है जिसका परिणामस्वरूप हिंसा,आतंकवाद और नस्लवाद का आतंक हमारे समक्ष है। हिंसा से बिखरती दुनिया को आज फिर समानता की तलाश है जो या तो              >  डॉ. सुनील शर्मा


8 अक्टूबर-वायुसेना दिवस पर विशेष
एक नज़र भारतीय वायुसेना पर

 

    देश की सुरक्षा का मुद्दा बहुत अहम और संवेदनशील है। लेकिन इस विषय पर आम चर्चा नहीं होती। हमारी सेनाएं जिन विसंगतियों से जूझती हैं उनका पता आम जनता को नहीं होता। यदा-कदा सेनाओं की  > डॉ. गीता गुप्त


धर्म व धार्मिकता की कसौटी


धार्मिकता की कसौटी क्या होनी चाहिए ? अपने अपने धर्म की प्रति आस्था ? कट्टरता के चमत्कार ? या कर्तव्य निष्ठा ? आश्चर्य होता है कि लोगों ने कैसी कैसी कसौटी अपने-अपने क्षेत्रों में  > डॉ. राजश्री रावत 'राज'