संस्करण: 04 मार्च-2013

सान्ता क्लाज़ को मात कर रहे हैं शिवराज

? एलएसहरदेनिया

                ध्यप्रदेश के ''घोषणावीर'' मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों बहुत जल्दी में दिख रहे हैं। उनकी घोषणाएं करने की गति में अप्रत्याशित तेजी आई है। वे सरकारी खजाने को लुटाने के अपने अभियान में प्राणपण से जुट गए हैं। वे जानते हैं कि कुछ ही माह बाद प्रदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी और उसके बाद उनके हाथ बां जावेंगे।

               घोषणाएं करने में शिवराज सिंह की कोई सानी नहीं है। एक अनुमान के अनुसार सितम्बर 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से लेकर अब तक वे लगभग सात हजार घोषणाएं कर चुके हैं। इनमें से अधिकांश घोषणाएं उनके निवास पर हुई ''पंचायतों'' में की गईं हैं जिनके आयोजन पर सरकार के दसियों करोड़ रूपये बर्बाद हो चुके हैं। अब तक वे किसानों औद्योगिक श्रमिकों, कृषि श्रमिकों, गैर-सरकारी संगठनों, कोटवारों, हम्मालों, घरेलू काम करने वाली बाईयों, केशशिल्पियों, छात्रों, पंचायत पदाधिकारियों, शिक्षकों, मछुआरों, शिल्पियों, अधिवक्ताओं और बुजुर्गों सहित कई अन्य वर्गों की पंचायतें आयोजित कर चुके हैं। इन घोषणाओं में से कितनी पूरी हुईं और कितनी नहीं और कितनी आधी-आूरी रहीं इसका लेखा-जोखा किसी के पास नहीं है।

                विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ-साथ उनकी घोषणाओं की गति के साथ-साथ उनकी प्रकृति में भी उल्लेखनीय परिवर्तन आ गया है। अब वे नदियों को जोड़ने, मध्यप्रदेश को देश का पॉवर हब बनाने जैसी भारी-भरकम घोषणाएं, जिनका परिणाम काफी समय बाद सामने आता है और जिनसे जनता सीधे-सीधे लाभान्वित नहीं होती, नहीं कर रहे हैं। इनके स्थान पर अब उनकी घोषणाएं ऐसी हैं जिनसे जनता की जेबों में सीो कड़कड़ाते  नोट पहुंचेगे।

                अभी हाल में मुख्यमंत्री निवास में मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं की परीक्षा में 85 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले हजारों छात्र-छात्राओं को लैपटाप खरीदने के लिए 25-25 हजार रूपये के चैक वितरित किए गए। सरकार ने यह भी तय किया है कि चिकित्सा विज्ञान व इंजीनियरिंग के स्नातक पाठयक्रमों में प्रवेश लेने वाले अनुसूचित जाति व जनजाति के विद्यार्थियो को मुत में लैपटाप दिए जाएंगे। इसके अलावा,अंतर्राष्ट्रीय खेस्पर्धाओं में भाग लेने वाले प्रदेश के खिलाड़ियों के पुरस्कार की राशि दुगुनी कर दी गई है।  मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भी की है कि सरकार किसानों के बिजली बिल की आधी राशि  चुकायेगी। गेंहू की समर्थन मूल्य पर खरीदी पर दिया जाने वाला बोनस रूपये 100 से बढ़ाकर रूपये 150 प्रति क्विंटल कर दिया गया है। घरेलू एलपीजी गैस सिलेन्डर पर एन्ट्री टैक्स घटा दिया गया है जिससे अनुदान वाले गैस सिलेन्डर की कीमत में रूपये 25 और गैर-अनुदान वाले गैस सिलेन्डर की कीमत में रूपये 45 की कमी आई है। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भी की है कि छोटे उद्यमियों द्वारा लिए जाने वाले रूपये 25 लाख तक के ऋण में मार्जिन मनी का भुगतान सरकार करेगी, ऋण की गारंटी लेगी और अगले पांच सालों तक पांच प्रतिशत ब्याज का भुगतान भी  करेगी। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भी की है कि किसी झुग्गी को हटाया  नहीं जाएगा और शहरों में स्थित सभी अवौध कालोनियों को वौध किया जाएगा।

               मुख्यमंत्री को घोषणाएं करने का इतना शौक है कि उन्होंने वित्तमंत्री राघवजी के लिए बजट भाषण में कहने के लिए कोई नई बात ही नहीं छोड़ी। बजट में जो भी घोषणाएं की गईं उन्हें मुख्यमंत्री पहले ही सार्वजनिक कर चुके थे। बेचारे राघवजी को केवल पुरानी घोषणाओं को दोहराकर संतोष करना पड़ा।

              शिवराज सिंह चौहान की नीतियां कितनी अर्थ-केद्रित रही हैं यह इस बात से जाहिर है कि सामाजिक क्षेत्र में उनके द्वारा शुरू की गई योजनाओं का आधार भी धन ही था। कन्या भू्रण हत्या को रोकने के उद्धेश्य से शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना में लड़कियों के माता-पिता को रूपये एक लाख के किसान विकास पत्र दिए जाते हैं। इसी उद्देश्य से शुरू की गई कन्यादान योजना में सरकार बच्चियों के विवाह का खर्च उठाती है। इसके अलावा लड़कियों को माता-पिता स्कूल भेजें इसके लिए उन्हें मुत में साईकिलें भी दी गईं। बुजुर्गों को मुख्यमंत्री ने मुत में तीर्थयात्रा करवाना शुरू किया है।

                स्पष्टत: मुख्यमंत्री समाज सुधार भी धन का लालच देकर करना चाहते हैं।  वे समाज में जागृति लाकर सामाजिक कुरीतियों का मुकाबला करने में विश्वास नहीं रखते। जाहिर है कि धन के लालच में यदि कोई व्यक्ति कन्या भू्रण हत्या नहीं करता या लड़कियों को स्कूल भेजता है तो इससे समाज की मनोवृत्ति में स्थायी बदलाव नहीं आता। 

                   बहरहाल मुख्यमंत्री का शायद यह मानना है कि विधानसभा चुनाव में मतदाता जब वोट देने के लिए मतदान केन्द्र में प्रवेश करेगा तो उसे यह याद रहेगा कि शिवराज सिंह चौहान के कारण उसकी जेब में कितने अतिरिक्त नोट हैं। और उसका हाथ स्वत: कमल के बटन की ओर बढ़ जाएगा।

? एलएसहरदेनिया