CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT

क्या सख्त कानूनों की कमी है ?

क्या मुल्क में होनेवाली आतंकी घटनाओं को रोक पाना इस वजह से सम्भव नहीं हो पा रहा है कि ऐसे सख्त कानूनों की कमी है जो इसे काबू में कर सके ? यह प्रश्न एक के बाद एक सामने आयी कुछ घटनाओं से नए सिरे से विचारणीय हो उठा है। >सुभाष गाताड़

      


यही है वामपंथियों का असली चेहरा
वामपंथी इन दिनों बेहद असमंजस में हैं। लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को माकपा से निष्कासित करने के बाद अब पार्टी के सामने यह यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया है कि अगले चुनाव में वे जनता के सामने क्या मुंह लेकर जाएंगे ? चटर्जी के निष्कासन पर माकपा में तेज़ हो रही अंदरूनी कलह के चलते यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी उनका निष्कासन रद्द कर सकती है, बशर्ते वे खेद व्यक्त कर दें।  >महेश बाग़ी


नीची नजरों वाली भाजपा क्या अपने गरेबान में झांक रही है?
ऐसा नहीं है कि भाजपा बिल्कुल ही अनभिज्ञ रही हो और उनके नियंत्रकों को उनके द्वारा किये जा रहे कामों के परिणामों का पता ही न हो! किंतु जब तक घर का लड़का रिश्वत के पैसे से पूरे घर के लिए तरह तरह के मिष्ठान्न और उपहार लाता रहता है तब तक घर के लोग उसकी ओर आशीर्वादी मुद्रा में वात्सल्य से
>वीरेन्द्र जैन


  1

अनुशसहीनता के चक्रवात में फंसी भाजपा
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि किसी मंत्रिपरिषद का वरिष्ठतम सदस्य जो स्वयं मुख्यमंत्री रह चुका है अपने ही वर्तमान मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से अक्षम व कमजोर कहे। हां यह अजूबा मध्यप्रदेश में हुआ है। अभी कुछ दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री तथा शिवराज सिंह चौहान मंत्रिपरिषद के वरिष्ठतम सदस्य बाबूलाल गौर ने हरदा में >एल.एस.हरदेनिया


किसान और कृषि राजनीति
भारत एक कृषि प्रधान देश है। भले ही पिछले 15 वर्षों में हमारे आर्थिक विकास की दिशा और दशा बदल गई हो, और कृषि की तुलना में आर्थिक क्षेत्र की दूसरी गतिविधियों ने तेजी से प्रगति करते हुए कृषि को पीछे छोड़ दिया है, लेकिन हमारे लोकतंत्र में चुनावी दृष्टि से आज भी राजनीति में किसान और खेती >चन्द्रशेखर दुबे


''नकारा साबित हुई शिव की सरकार''

भारत सरकार के नियंत्रक महालेखाकार (कैग) की नज़र में राज्य की शिवराज सिंह चौहान सरकार हर मोर्चे पर फेल रही है, इस भाजपा सरकार ने मध्यप्रदेश की जनता को न पानी दिला सकी, न ही बिजली उत्पादन का लक्ष्य पा सकी और न ही देशी-विदेशी पर्यटकों को लुभाने में सफल हो सकी राज्य सरकार। वर्ष 2007 की वार्षिक बजट के >राजेन्द्र श्रीवास्तव


8 अगस्त-तुलसी जयंती पर विशेष रामचरित मानस में है राज संचालन का संदेश
संत कवि तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस जहाँ एक ओर उनकी रामभक्ति को अभिव्यक्त करने वाला ग्रंथ है, वहीं इस ग्रंथ में तुलसीदासजी ने राज संचालन के महत्वपूर्ण सूत्रों को भी भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया है। राज संचालन के लिए सिंहासन पर आरूढ़ व्यक्ति में >राजेन्द्र जोश

              


स्वास्थ्य को भारतीय ज्ञान परंपरा से
जोडने की जरूरत

 हाल ही में कुछ ऐसे समाचार देखने में आए जिन्हें पढ़कर मैं आश्चर्य चकित तो हुआ ही दशकों पुरानी स्मृतियों में भी लौटना पड़ा। एक समाचार का सार था कि जल में प्रसव कराए जाने से पीड़ा कम होती है और दिल्ली में इस पध्दति से कुछ नर्सिंग होमों में प्रसव कराए जाने का सिलसिला >प्रमोद भार्गव


आर्थिक उदारीकरण से जूझते लघु उद्योग
स्व तंत्रता प्राप्ति के बाद से देश में तेजी से औद्योगीकरण हुआ है और इसी ने देश के आर्थिक विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले पांच दशकों में औद्योगिक उत्पादन करीब 5 गुना हो गया है । इसी कारण आज भारत को विश्व का दसवां सबसे बड़ा राष्ट्र बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। देश में लगातार औद्योगिक वस्तुओं के आयात में >स्वाति शर्मा

     


उच्च शिक्षा का स्तर कैसे सुधरे
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 11 वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान देश में 735 नए विश्वविद्यालय खोलने की जरूरत बताई है। साथ ही 2162 नए कॉलेज खोलने की आवश्यकता बताई है। यू.जी.सी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के अनुसार वर्तमान के उच्च शिक्षा में 10 फीसदी नामांकन को वर्ष 2012 तक 15 फीसदी तक पहुंचाने के लिए इन संस्थानों  >डॉ. सुनील शर्मा


लुप्तप्राय नदियों में शुमार है हमारी पवित्र गंगा

कितनी श्रध्दा रखते हैं, हम सब अपनी गंगा मैया पर। फिर चाहे वह इलाहाबाद का तट हो या हरिद्वार का, लखनऊ हो या आगरा, हर जगह हम रोज सुबह देखते हैं कि लोग अपनी श्रध्दा को किस तरह से प्रदर्शित करते हैं। इनकी श्रध्दा ही इनका विश्वास है। अगर इन्हें यह कहा जाए कि गंगा अब हमारे > डॉ. महेश परिमल

    


04अगस्त2008

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved