संस्करण: 04अगस्त-2008

''नकारा साबित हुई शिव की सरकार''

 

राजेन्द्र श्रीवास्तव

भारत सरकार के नियंत्रक महालेखाकार (कैग) की नज़र में राज्य की शिवराज सिंह चौहान सरकार हर मोर्चे पर फेल रही है, इस भाजपा सरकार ने मध्यप्रदेश की जनता को न पानी दिला सकी, न ही बिजली उत्पादन का लक्ष्य पा सकी और न ही देशी-विदेशी पर्यटकों को लुभाने में सफल हो सकी राज्य सरकार। वर्ष 2007 की वार्षिक बजट के बाद प्रस्तुत नियंत्रक महालेखाकार की रिपोर्ट में कई हकीकत सामने आई। करोड़ों रुपये केन्द्र व राज्य के खजाने से निकालकर भी सरकार ने जनता के साथ न्याय नहीं किया।

 

म.प्र. राज्य पर्यटन विकास निगम की होटल और मोटल में देशी और विदेशी पर्यटक ठहरने वालों की संख्या में वर्ष 2002-03 से 2006-07 के बीच लगातार कमी आंकी गई है। 2002-03 में जहाँ प्रदेश में आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों में से केवल 1-86 फीसदी निगम की होटल-मोटल में ठहरे, वहीं यह प्रतिशत वर्ष 2006-07 में घटकर 1.28 रह गया। इसके पीछे निगम में देरी से निर्णय होना व कई सुविधाओं की कमी रही। भारत के नियंत्रक महालेखाकार के 31 मार्च 07 के वार्षिक प्रतिवेदन में यह स्थिति बताई गई है। इस रिपोर्ट में टिप्पणियां की गई हैं कि देश में वर्ष 2002-03 से वर्ष 2006-07 तक के बीच 1.72 करोड़ विदेशी पर्यटक आये। जिनमें से मध्य प्रदेश में 7.28 लाख आये। इनमें से केवल 42 हजार विदेशी पर्यटक ही पर्यटन निगम के होटल-मोटल में ठहरे। यही रूख देशी पर्यटकों का रहा। इसके पीछे निगम में देरी से निर्णय होना व कई सुविधाओं की कमी रही। भारत के नियंत्रक महालेखा के 31 मार्च 07 के वार्षिक प्रतिवेदन में यह स्थिति बताई गई है। इस रिपोर्ट में टिप्पणियां की गई हैं कि देश में वर्ष 2002-03 से वर्ष 2006-07 तक के बीच 1.72 करोड़ विदेशी पर्यटक आये। जिनमें से मध्य प्रदेश में 7.28 लाख आये। इनमें से केवल 42 हजार विदेशी पर्यटक ही पर्यटन निगम के होटल-मोटर में ठहरे। यही रूख देशी पर्यटकों का रहा।

 

वर्ष 2008 का सदी का सबसे गर्म साल होने की आशंकाओं के बीच पेयजल आपूर्ति के लिये जिम्मेदार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पर आई भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट बैचेन करने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक 1992 में अब तक ग्रामीण जल आपूर्ति कार्यक्रम पर करोड़ों रुपये खर्च कर देने के बावजूद हजारों बसाहटें अब भी पानी से महरूम हैं। विभाग द्वारा महालेखाकार परीक्षक को उपलब्ध  करवाए गए आंकड़ों में हेराफेरी की गई है। राज्य केन्द्र की योजना में समरूपी अंशदान (मैचिंग ग्रांट) देने और ग्रामीण जल आपूर्ति कार्यक्रम की निधियों का उपयोग करने में असफल साबित हुआ है। सरकार ने गांवों और बसाहटों को आठवीं योजना (1992-97) में 40 लीटर प्रति व्यक्ति, प्रतिदिन के हिसाब से शुध्द पेयजल उपलब्ध  करवाने का वायदा यिका था, जो पूरा नहीं हो पाया है। अमरकंटक की जिस 210 मेगावाट की इकाई का काम वक्त पर पूरा नहीं करने पर राज्य सरकार केन्द्र और उसके उपक्रम भेल को दोषी ठहरा रही है, नियंत्रक महालेखा परीक्षक ने यह काम कराने के फैसले की ही अदूरदर्शी ठहरा दिया है। इतना ही नहीं इस पावर हाउस की फेस-I और-II के संचालन को महालेखाकार परीक्षक ने असंतोषजनक पाया है।

नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के काम में देरी की वजह से 1140 करोड़ 35 लाख रुपये मूल्य की बिजली की कमी हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि पावर जनरेटिंग कम्पनी ने विद्युत केन्द्र के खुले मैदान में 200 मेगावाट एक इकाई को जोड़ते हुए वर्तमान संयंत्र की क्षमता 290 मेगावाट को बढ़ाने की योजना बनाई थी। बाद में 250 और उसके बाद 210 मेगावाट की विस्तार इकाई बनाने का निर्णय लिया। यह मार्च 2007 में पूरा होना था, जो अब तक नहीं हुआ। 18 साल पहले बनकर तैयार प्रदेश की 8 उपजेलों का अभी तक उपयोग शुरू नहीं हो सका है। इन उपजेलों पर केन्द्र सरकार ने 2.86 करोड़ रुपये खर्च किया गया था। 1.14 करोड़ रुपये की बनी 3 उपजेलों में बंदियों को रखने के स्थान पर दूसरे विभागों का देकर उनका उपयोग परिवर्तन किया गया। भारत सरकार के नियंत्रक महालेखाकार की 31 मार्च 07 की रिपोर्ट में इन तथ्यों का खुलासा किया गया है। 1990-95 में महेश्वर, बड़नगर, मनावर, त्योथर और सोनकच्छ उपजेलों का जेल विभाग ने आधिपत्य लिया था। इन जेलों पर 1.72 करोड़ रुपये के खर्च किया गया था। जेल विभाग का कहना था कि बड़नगर में तो पानी की समस्या के कारण उपजेल का शुरू हो पाना मुश्किल है। कई टयूब-वेल खोदे गए, लेकिन कोई सफल नहीं हो सका।

 

राजेन्द्र श्रीवास्तव