संस्करण:  02 अगस्त-2010   

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सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड प्रसंग
वसूली शाह अन्दर, अब सम्राट की बारी !


हान फ्रांसिसी उपन्यासकार बाल्जाक के एक उपन्यास में दिन में पुलिस प्रमुख बननेवाले व्यक्ति के रात में अपराधी में होते रूपान्तरण की बात की गयी थी। लेकिन शायद वे इस बात का अन्दाज़ा नहीं लगा सके थे>सुभाष गाताड़े

 


 

सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ :
कि मिटते नहीं निशां लहू के


     सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मोदी सरकार के लिए गले की फांस बन कर रह गई है। सूबाई पुलिस महकमे और सीआईडी पुलिस के, एक के बाद एक अफसरों की गिरफ्तारी के बाद अब बारी गुजरात के गृहमंत्री अमित >जाहिद खान
 


 

भाजपा में मुख्यमंत्री की चयन-
निष्कासन प्रणाली में धन की भूमिका

 

 ध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधान सभा में विपक्ष के हंगामे के बाद और दो दिन तक लगातार सदन स्थगन होते रहने के बाद अपने विवादास्पद बयान का भाष्य करना स्वीकार किया।>वीरेंद्र जैन

 


 

लोकायुक्त का नाकारापन

   इंदौर के सुगनी देवी कॉलेज का भूमि घोटाला गत तीन माह से अख़बारों की सुर्खियों में है। राज्य विधानसभा में भी यह मामला उठ चुका है। लोकायुक्त संगठन को कोर्ट ने इस घोटाले की जांच सौंपी है। कांग्रेस ने>महेश बाग़ी
 


भाजपा की चाल, चरित्र और चेहरा
गुजरात में दूसरा मंत्री हत्या के आरोप में गिरफ्तार


  गुजरात में जो भी होता है उससे  सारा देश हिल जाता है। कुछ दिनों पूर्व वहां की एक महिला मंत्री (माया कोडनानी) को सन् 2002 के सांप्रदायिक दंगों में भाग लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और अब>एलएसहरदेनिया
 


 

कांग्रेस-स्वतंत्रता पूर्व से अब तक

 व्यक्ति एवं समाज को जिन आदर्शों, सिद्धांतों, विचारधाराओं एवं अवाधारणाओं ने सर्वाधिक प्रेरित किया है, संभवत: उनमें स्वतंत्रता सर्वोपरि है। स्वतंत्रता मानव जीवन की एक अनिवार्य दशा है। वह स्वतंत्र रहना>क्षेत्रपाल


 

राजनीति में धन बल और बाहुबल के बाद अब 'शब्द बल' का प्रवेश

 राजनीति का मतलब अब वह नहीं रहा जिस मतलब के लिए राजनीति शब्द चलन में आया है। राजनीति का इस वक्त विडंबना काल चल रहा है। यह एक ऐसा काल बन गया है जिसमें राजनीति के भीतर की शालीनता, मधुरता,>राजेंद्र जोशी


 

सड़ता अनाज, बढ़ता गरीब

         ह कितनी विडबंनापूर्ण स्थिति है कि एक ओर तो देश के गोदामों और रेलवे स्टेशनों पर लाखों टन गेहूं सड़कर बरबाद हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ गरीबों और भूखों की संख्या में वृद्धि हो रही है। आज गरीबी>प्रमोद भार्गव


 

वित्तीय साक्षरता समय की जरूरत

    मारे यहाँ यह कहावत कि 'पूत कपूत तो का धन संचय,पूत सपूत तो का धन संचय ' प्रचलित रही है और कुछ दशक पूर्व तक हमारी समाज में धन संचय को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। धन की लालसा की>डॉ सुनील शर्मा


 

क्या भारतीय रुपए को खुला
आसमान मिल पाएगा?


भारत के रुपए ने इतिहास में पहली बार अपनी पहचान कायम की है। नए प्रतीक के साथ वह अब अखबार में दिखने लगा है। बहुत ही जल्द वह अब कंप्यूटर की की बोर्ड में भी नजर आने लगेगा। अभी तक डालर ओर पाउंड के>डॉ महेश परिमल


 

दु:खद स्वप्न न बन जायें स्कूल

 भारत ही नहीं पूरी दुनिया में बच्चों की पिटाई आम बात है। एक सर्वेक्षण के अनुसार 65 प्रतिशत बच्चे घर के अलावा शिक्षा संस्थाओं में भी पीटे जाते हैं। ग्राम-देहात के घरों और विद्यालयों में बच्चों की पिटाई>डॉ ग़ीता गुप्त


02 अगस्त-2010   

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