संस्करण: 01सितम्बर-2008

नेताओं की रैली में गया मध्यान्ह भोजन का बजट

अमिताभ पाण्डेय

स्कू ल में पढ़ने वाले बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहे इसके लिए सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था की गई है। बच्चों को गुणवत्ता युक्त भोजन मिले इसके लिए शासन द्वारा प्रत्येक स्कूल को अलग से राशि स्वीकृत की जाती है। मध्यान्ह भोजन के लिए दी जाने वाली राशि का कितना और कैसा उपयोग हो रहा है? स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन पर्याप्त मात्रा में मिल पा रहा है अथवा नहीं? जो भोजन दिया जा रहा है वह नियमित रूप से वितरित हो रहा है या कई बार नहीं दिया जा रहा है? ऐसे अनेक सवाल है जिनका जवाब तलाशने पर पता चलता है कि मध्यान्ह भोजन योजना भी लापरवाही, उदासीनता एवं भ्रष्टाचार का शिकार हो गई है। इस योजना में गड़बड़ी के अनेक उदाहरण हमारे आसपास ही आसानी से देखे जा सकते हैं।

 

मध्यान्ह भोजन में गड़बड़ी को लेकर अनेक समाचार देखने पढ़ने को मिलते है परन्तु हाल ही में मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले से जो जानकारी सामने आई है उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि कुछ अधिकारियों ने इस योजना को मजाक बना दिया है। ये अधिकारी बच्चों से ज्यादा अपनी जिम्मेदारी सत्तारूढ़ नेताओं के प्रति प्रदर्शित करना चाहते है जिसके लिए उन्होंने मध्यान्ह भोजन के लिए स्वीकृत राशि को खर्च करने में भी परहेज नहीं किया है। मध्यान्ह भोजन के लिए स्वीकृत राशि का उपयोग वाहनों पर खर्च किये जाने के निर्देश जारी कर दिये गये। जिन वाहनों पर यह राशि खर्च किये जाने के निर्देश जारी किये गये, उन वाहनों में लोगों की भी को लेकर उस स्थल तक लाने की व्यवस्था की जाना थी जहां मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सहित राज्य मंत्रिमण्डल के कुछ अन्य सदस्य एवं भाजपा पदाधिकारी आम सभा को सम्बोधित करने वाले थे।

 

दरअसल यह मामला टीकमगढ़ जिले का है जहां जिला मुख्यालय पर गत 23 जुलाई को मुख्यमंत्री सहित कुछ मंत्रिमण्डल सदस्य और भाजपा पदाधिकारी महिला सशक्तिकरण सम्मेलन एवं आम सभा को सम्बोधित करने आने वाले थे। इस सम्मेलन में ज्यादा से ज्यादा लोग पहुंचें, अधिक से अधिक भिड आये इसके लिए टीकमगढ़ जिले के भाजपा पदाधिकारियों ने अपने स्तर पर प्रयास किये। इसके साथ ही जिले की पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मूलचंद वर्मा ने भी अपने मातहत कर्मचारियों को सम्मेलन की सफलता सुनिश्चित करने में लगा दिया। श्री वर्मा ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को यह निर्देश भी जवाये कि मुख्यमंत्री की सभी में अधिक से अधिक महिलाओं, नागरिकों को लाया जाये। इस निर्देश के पालन में जनपद पंचायत निवाड़ी के मुख्य कार्यपालन आर.जी. अहिरवार ने मध्यान्ह भी बनाने में लगे सभी स्व सहायता समूहों को यह लिखित आदेश दिया कि समूहों के सदस्य पुरुष, महिलाएं अधिक से अधिक संख्या में लोगों को मुख्यमंत्री की सभा में ले जाये। लिखित आदेश में यह सभी उल्लेख था कि लोगों को लाने ले जाने के लिए वाहन के किराये पर खर्च होने वाली राशि को मध्यान्ह भोजन के बजट में समायोजित कर दिया जाये। यह आदेश भी दिया गया कि जो स्व सहायता समूह अधिक से अधिक लोगों को आयोजन में नहीं ले जायेंगे, उनसे मध्यान्ह भोजन बनाने का काम वापस ले लिया जायेगा। इस प्रकार के आदेश टीकमगढ़ जिले के विभीन्न स्कूलों में मध्यान्ह भोजन बनाने वाले अनेक स्व सहायता समूहों को मिले है जिनमें मुख्यमंत्री की सभा को सफल बनाने के लिए वाहन लाने ले जाने पर खर्च होने वाली राशि को मध्यान्ह भोजन के खर्च में समायोजित करने की बात कही गई है।

 

इतना ही नहीं मुख्यमंत्री के टीकमगढ़ आगमन पर समाचार पत्रों में जो विज्ञापन जारी किये गये उनमें भाजपा नेताओं के साथ ही टीकमगढ़ के कलेक्टर के.पी. राही और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मूलचंद वर्मा के फोटो एवं जिला महिला बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी बृजेश त्रिपाठी के नाम भी शामिल थे। सवाल यह है कि क्या इन विज्ञापनों पर होने पर खर्च की राशि भी मध्यान्ह भोजन के बजट से ही समायोजित की गई है

 

यदि मध्यान्ह भोजन के बजट का उपयोग सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं की रैली, आमसभा को सफल बनाने के लिए किया जाये तो यह बच्चों के हित में नहीं है। नेताओं की रैली के लिए बच्चों के मध्यान्ह भोजन हेतु राशि का कहीं भी उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

 

उल्लेखनीय है कि टीकमगढ़ जिले में 6 जनपद पंचायत कार्यालय है। इन जनपदों के अन्तर्गत आने वाले गांव टीकमगढ़ जिला मुख्यालय से 100-150 किलोमीटर दूर भी हैं। इन दूरस्थ गांवों से लोगों को वाहन द्वारा टीकमगढ़ तक लाने में प्रत्येक स्व सहायता समूह को 1,000 से 1,500 रुपये तक खर्च करना पड़े।

 

इन समूहों द्वारा खर्च की गई यह राशि मध्यान्ह भोजन के बजट में समायोजित कर दी जायेगी। जैसा कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने लिखित आदेश दिया है। इस प्रकार के आदेश निकालने वाले अधिकारियों के विरूद्ध कोई प्रभावी कार्यवाही होगी इसकी उम्मीद कम ही है। मुख्यमंत्री की रैली भीले ही सफल हो गई है, लेकिन इसके बाद टीकमगढ़ जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मध्यान्ह भोजन नियमित और गुणवत्ता युक्त मिल पायेगा अथवा नहीं यह भी एक बड़ा सवाल है?

 

अमिताभ पाण्डेय