बचाने का प्रयास किया। क्या प्रदेश सरकार के एक केबिनेट मंत्री द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दिये बिना, किये गये ऐसे प्रयास से प्रदेश सरकार द्वारा की जा रही जांच प्रभावित नहीं होगी ? क्या इसके बाद भी प्रदेश के मुख्यमंत्री को उन्हें पद पर बनाये रखने की कोई विवशता है ?

 

उल्लेखनीय है कि अहमदाबाद में आसाराम बापू के आश्रम में रहने वाले दो बालकों की दुखद हत्या के बाद मधयप्रदेश के छिंदवाड़ा में भी दो बालकों की हत्या कर दी गयी थी। इन हत्याओं के बाद पूरे देश में फैले आसाराम के आश्रमों के बारे में निरंतर आरोप सामने आते गये जिससे पूरे देश की आंखे खुल गयीं और लोगों की समझ में आने लगा कि धाार्मिक भावनाओं को भुनाने वाले इन आश्रमों में क्या चल रहा है व इनके पास कितनी सम्पत्ति एकत्रित है। धान सम्पत्ति के प्रति वैराग्य की बातें करने वाले ये पाखंडी लोग अपने पास अटूट सम्पत्ति एकत्रित करते जाते हैं तथा कभी आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर तो कभी पूजन भजन सामग्री के नाम पर उद्योग चलाते हैं तथा धाार्मिक वेषभूषा को ओढ़ेंगे सरकारी करों की चोरी भी करते हैं।

 

अहमदाबाद के साबरमती के मोटेरा स्थित आश्रम से 29 जून की रात्रि में दो बच्चे गायब हुये और उनके शव 5 जुलाई का साबरमती के तट पर पाये गये। इन दोनों ही लाशों के, मरने से पूर्व (या बाद में) मुंडन किया गया था जिससे आभास होता था कि किसी तांत्रिक अनुष्ठान के लिए इनकी बलि दी गयी थी। इस अवसर पर इस बात को स्मरण रखना होगा कि समाजवादी धार्मनिरपेक्षता के प्रति प्रतिबध्द भारतीय संविधाान के अनुसार संचालित लोकतंत्र में भी अनेक नेता चुनाव जीतने के लिए जनता का विश्वास जीतने की जगह तांत्रिक अनुष्ठानों में भरोसा करते हैं। मधयप्रदेश में भाजपा शासन की एक मुख्यमंत्री ने अपने शपथग्रहण समारोह में जनता के प्रति आभार व्यक्त करने की जगह ढेर सारे साधाु सन्त वेषधाारियों को एकत्रित कर उनके प्रति आभार माना था व जनता के हित में कोई धाारणा करने की जगह पहला काम यह किया था कि उन्होंने तिरूपति जाकर अपना मुंडन करवाया था। जिन दिनों वे तिरूपति में रही थीं उन दो दिनों में वहाँ के दान पात्रों में सामान्य दान से डेढ़ करोड़ रुपये अधिाक निकले थे।

 

आसाराम के आश्रमों के प्रति मोहभंग होते ही कभी उनके भक्त रहे हजारों लोग सड़कों पर उतर आये थे व आश्रम के सामने विरोधा करने पहुँचे थे। इस विरोधा प्रदर्शन से नाराज होकर इन प्रदर्शनकारियों पर आश्रम के कर्मचारियों से हमला करा दिया गया था जिससे सैकड़ों लोग आहम हो गये थे। जब आसाराम मृतक बच्चों के घर शोक प्रदर्शन करने पहुंचे तो रास्ते में उन्हें लोगों के विरोधा और हिकारत का सामना करना पड़ा तथा मृतक के पिता ने उनसे कोई बात नहीं की जिससे वे वहाँ कुल चन्द क्षण ही रूक सके। बाद में बच्चे के पिता ने वह सारा सामान आग के हवाले कर दिया जिसे आसाराम ने छुआ था। पूरे गुजरात में लोग विरोधा प्रदर्शन करके गुजरात सरकार को धिाक्कार रहे थे। उनकी विरोधा पट्टियों पर लिखा हुआ था कि वोट जनता का पर गुलामी आसाराम की।

 

इस बीच मधयप्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित आश्रम में भी दो बच्चों की मृत्यु हो गयी जिसे मधयप्रदेश की सरकार के इशारे पर म.प्र. पुलिस ने एक सहपाठी पर आरोप मढ़ कर आश्रमवासियों को बचाने की कोशिश की जिससे पूरे छिंदवाड़ा में विरोधा हुआ। अंतत: गुजरात सरकार को जनता का रूख भांपते हुये कुछ कार्यवाही करनी ही पड़ी क्योंकि भाजपा के प्रधाानमंत्रीपद प्रत्याशी लालकृष्ण आडवाणी का चुनाव क्षेत्र अहमदाबाद ही है व उनके चुनाव में इस सिन्धाी बहुल क्षेत्र में आसाराम के भक्तों से बहुत सहयोग मिलता रहा था। जब गुजरात सरकार को समझ में आया कि जन रूझान आसाराम के खिलाफ है तब गुजरात सरकार ने ताबड़तोब कार्यवाही प्रारंभ कर दी। दस अगस्त को बापू के बेटे नारायण सांई पर अयाशी के आरोप लगे साधिाकाओं के साथ रासलीला रचाने वाला बताया गया। मुम्बई निवासी एक साधिाका ने यह आरोप लगाये। एक युवक महेन्द्र चौहान ने सांई पर तांत्रि&#