संस्करण: 01सितम्बर-2008

देश को बांटने वाले आंदोलन क्यों करता है

संघ परिवार ?

एल.एस.हरदेनिया

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अंग्रेजी में प्रकाशित होने वाले मुखपत्र का नाम ''आर्गेनाइजर'' है। आर्गेनाईजर'' के दिनांक 24 अगस्त 2008 के अंक में एक विज्ञापन छपा है। विज्ञापन के माध्यम से उन आधारों को सूचीबध्द किया गया है। विज्ञापन के माध्यम से उन कारणों को सूचीबध्द किया गया है जिनसे पाठकों को इस पत्र को हमेशा पढ़ा जाना चाहिए। ये सारे के सारे कारण देश व समाज को धार्मिक रूप से विभाजित करने वाले हैं। साप्ताहित पत्र में उन समाचारों को सूचीबध्द किया गया है जो इस साप्ताहिक के पिछले अंकों में छपे थे। वे समाचार थे (देश का) मीडिया हिन्दू विरोधी है, यूपीए सरकार आए दिन हिन्दूओं का अपमान करती रहती है, रामसेतु प्रोजेक्ट हिन्दू संस्कृति व इतिहास को धवंस करने की योजना है, यूपीए मुसलमानों के विकास के लिए अलग योजना बनाती है, रंगनाथ मिश्रा आयोग और सच्चर कमेटी की सिफारिशें देश को बांटने वाली हैं, हिन्दुओं को अपना पृथक वोट बैंक बनाना चाहिए, नकली मुद्रा और काला धान आतंकवादियों को बढ़ावा देते हैं।

संघ परिवार का यह अखबार और स्वयं संघ परिवार ऐसे ही कार्यक्रमों को बढ़ावा देते हैं और हाथ में लेते हैं जिनसे देश में फूट पड़ती है, देश मानसिक व मनोवैज्ञानिक रूप से बंट जाता है। यदि इतिहास में झांकने की कोशिश की जाए तो याद आएगा कि 1952 के आसपास तत्कालीन जनसंघ ने मुसलमानों के भारतीयकरण का नारा दिया था। संविधान के स्पष्ट प्रावधान के बावजूद भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी ने अल्पसंख्यकों और अल्पसंख्यकवाद की भर्त्सना की,उन्होंने कांग्रेस और अन्य सेक्यूलर पार्टियों पर मुसलमानों के तुष्टिकरण का आरोप लगाया, इन्होंने बाबरी मस्जिद गिराई, बाबरी मस्जिद गिराने के पहिले नारा उन्होंने दिया ''मंदिर वहीं बनाएंगे''। इस नारे में यह आव्हान छिपा था कि यदि राममंदिर वहीं बनाना है तो बाबरी मस्जिद को गिराना होगा। कार सेवा के नाम पर पूरे देश को धर्म के नाम पर बांटा, गोधारा में ट्रेन में लगी आग के बाद सारे गुजरात को साम्प्रदायिक आग को झोंक दिया, सच्चर कमेटी की रिपोर्ट आई तो उसे मुसलमानों का तुष्टिकरण बताया, हाल की घटनाओं को लें तो भारतीय जनता पार्टी ने रामसेतु का मसला हाथ में लेकर दक्षिण और उत्तर भारत में मतभेद पैदा किया गया। भारतीय जनता पार्टी का सहयोगी राजनीतिक दल शिवसेना आए दिन देश को बांटने वाले नारे देता है। पहिले उसने दक्षिण भारतीयों को मुंबई छोड़ने का आदेश दिया, फिर बिहारी व उत्तर प्रदेश के लोगों के विरुध्द जहर फैलाया। अभी कुछ दिन पूर्व शिवसेना प्रमुख ने हिन्दुओं से हथियार उठाने और आत्मघाती दस्तें बनाने का आव्हान किया। इसी तरह जब भी कोई आतंकवादी घटना होती है, संपूर्ण संघ परिवार सभी मुसलमानों पर अंगुली उठाता है, सभी मुसलमानों को संदेह की निगाह से देखता है। इसी तरह बेसिरपैर की बातें सारे देश में आतंकवादी गतिविधियों के विरुध्द रोष प्रगट करने के लिए जो भी आंदोलन (बंद, चक्काजाम) होता है, उनके दौरान मुसलमानों के विरुध्द भड़काऊ नारे लगाए जाते हैं। जब भी कोई आतंकवादी घटना होती है, बिना कोई जांच किए सिमी और मुसलमानों को दोषी ठहरा दिया जाता है। 3 जुलाई को इंदौर में दोनों समाजों के बीच संघर्ष हुआ और साम्प्रदायिक हिंसा भी हुई। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिमी को उसके लिए दोषी मान लिया।

अभी हाल में कश्मीर में अमरनाथ यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं के संदर्भ में संघ परिवार ने सारे देश को बांटने का प्रयास किया है। इस मुद्दे को लेकर जिस प्रकार से संघ परिवार ने आंदोलन किया है वह फूट डालकर खाई को और गहरा करने की उनकी रणनीति का हिस्सा है। संघ परिवार के सदस्य बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद ने सारे देश में कश्मीर के उत्पादों की होली जलाई, वहाँ के उत्पादों को घाटी से बाहर शेष भारत में आने से रोका, तथा जम्मू-श्रीनगर सड़क को ब्लाक करके आवश्यक वस्तुओं को घाटी पहुँचने से रोका। यहाँ तक कि भोपाल में कश्मीरी व्यंजनों के विशेष आयोजन में रंग भंग किया। उनकी यह हरकत अत्यधिक बचकानी है और इस बात की ओर इशारा करती है कि कश्मीर हमारे देश का अंग नहीं है। यदि हम कश्मीर का माल नहीं खरीदेंगे और यहाँ से जानेवाली वस्तुओं को वहाँ नहीं पहुँचने देंगे तो हम यह दावा कैसे कर पाएंगे कि कश्मीर भारत का अंग है ?

संघ परिवार के दोनों साप्ताहिक (अंग्रेजी में आर्गेनाइजर और हिन्दी में पांचजन्य) आए दिन अल्पसंख्यकों और विशेषकर मुसलमानों के विरुध्द जहर उगलते रहते हैं। उदाहरण के लिए 24 अगस्त के पांचजन्य के अंक को लें। उसके प्रथम पृष्ठ पर दिए गए समाचार को ही लें। समाचार का शीर्षक ऐसा है जो भारत में रहने वाले सभी बांग्लादेशियों को संदेह के घेरे में डाल देता है। इसी पृष्ठ पर ही एक अन्य शीर्षक है ''जम्मू के घेरे में डाल देता है। इसी पृष्ठ पर ही एक अन्य शीर्षक है ''जम्मू लड़ रहा है भारत की लड़ाई''। भीतर के पृष्ठ में छपे एक लेख का शीर्षक है ''सरकार ने फिर दी अलगाववादी को हवा''। विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री डॉ. प्रवीण तोगड़िया का कहना है कि ''राष्ट्र द्रोहियों को सीमा पर भेजकर वापिसी का रास्ता बंद कर दो।'' एक और शीर्षक है कि ''हिन्दू विरोधी मानसिकता अस्वीकार जम्मू के जलते सवाल, एक और शीर्षक है ''बांग्ला देशी घुसपैठियों पर प्रतिवर्ष 90 करोड़ खर्च।'' इसी तरह आर्गेनाईजर का शीर्षक है ''इस्लाम द्वारा भारत की घेराबंदी।'' इस तरह संघ परिवार की संपूर्ण भूमिका बांटने वाली है।

क्यों नहीं संघ परिवार इस तरह का आंदोलन करता है जो भुखमरी को समाप्त करने के लिए हो, जो देश की विविधाता के बावजूद एकता स्थापित करने के लिए हो, जो विभिन्न धर्मावलंबियों के बीच में सौहार्द और विश्वास पैदा करने के लिए हो। कुल मिलाकर हमारे देश को ऐसे आंदोलनों की आवश्यकता है, जिनसे देश का पिछड़ापन, देश में व्याप्त बेकारी और देश में दिन-रात बढ़ती हुई हिंसा की समाप्ति संभव हो सके।

एल.एस.हरदेनिया