संस्करण: 01 मार्च-2010

सामाजिक सरोकारों की झलक है रेल बजट में
सभी वर्गों और क्षेत्रों को रेलमंत्री ने दिया कुछ न कुछ तोहफा

 

राजेंद्र जोशी

 रलमंत्री सुश्री ममता बनर्जी ने लोकसभा में वर्ष 2010-11 का रेल बजट प्रस्तुत करते हुए आश्वस्त किया है कि इस बजट में सभी वर्ग के यात्रियों की रेल सुविधाएं बढ़ेगी और यात्रा के दौरान उनकी जान माल की सुरक्षाऐं सुनिश्चित की जायगी। रेलमंत्री ने यात्री-किराया में किसी भी तरह की न तो बढ़ौत्री की है और न ही मालभाड़ा बढ़ाया है। रेलकर्मियों, वरिष्ठ नागरिकों, विकलांगों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए सुविधाऐं घोषित करने के साथ ही रेल्वे भर्ती प्रक्रिया को कारगर बनाते हुए भरती के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षाऐं आयोजित करने की घोषणा भी की गई है।

ममताजी के इस बजट में सामाजिक सरोकारों की स्पष्ट छवि झलक रही है। उन्होंने संपूर्ण देश को कुछ न कुछ देने का भरसक प्रयास किया है। उन्होंने अगले 5 सालों में पूरे देश को रेल सुविधाओं से जोड़ने का आश्वासन भी दिया है। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की स्मृति में 16 भारत तीर्थ ट्रेन के नाम से रेल चलाई जायेगी जो सारे देश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ेगी। रेलमंत्री के इस बजट की विशेषता है कि उन्होंने 'मातृभूमि,' 'कर्मभूमि' और 'जन्मभूमि' नाम से रेल गाड़ियां चलाने की भी घोषणा की है। मातृभूमि नामक 20 ट्रेन चलेगी जो महिलाओं के लिए विशेष रूप से होंगी। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए तीन 'कर्मभूमि' रेल चलेंगी।

रेल बजट में अब तक देश के ऐसे उपेक्षित क्षेत्रों में भी रेल सुविधाओं की घोषणा की गई है जहां पहले कभी रेल व्यवस्था थी ही नहीं। यह पहला अवसर है जब अंडमान को भी रेल सुविधा का तोहफा दिया गया है। सिक्किम और मेघालय पर भी ममताजी ने कृपा दिखाई है। कुल 117 नई रेलगाड़ियां चलाई जायंगी। मुंबई के लिए 101 नई उपनगरीय ट्रेनों का तोहफा दिया गया है, तथा देश के विभिन्न स्टेशनों से 10 दूरंतों ट्रेन भी चलाई जायगी। रेल्वे स्टेशनों को अपग्रेड करने की घोषणा के साथ ही रेल्वे के 14 कर्मचारियों के लिए 'हाऊस फार आल' योजना चालू करने की घोषणा की गई है। वरिष्ठ नागरिकों और विकलांगों की आवाजाही के लिए स्टेशनों पर विशेष सुविधाओं का प्रावधान किया जायगा। यात्रियों को जनता आहार में सस्ता भोजन उपलब्ध कराया जायगा और रेल्वे स्टेशनों पर 7 रुपये से लेकर 10 रुपये तक पानी की बोतलें मिला करेंगी। बजट में चिकित्सा सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। रेलमंत्री ने जब 522 रेल्वे अस्पताल खोले जाने की घोषणा की तो सदन ने उभरी इस घोषणा का जोरदार स्वागत किया। कैंसर के मरीजों को तृतीय ए.सी. और स्लीपर में नि:शुल्क यात्रा सुविधाऐं देना भी रेलमंत्री का एक स्वागतयोग्य कदम है।

सामान्य जन को रेल टिकिट आरक्षण में सुविधा उपलब्ध कराने पर भी रेलमंत्री का ध्यान गया है। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था को सुविधायुक्त और सुचारू बनाने के लिए एस.एम.एस. से आरक्षण कराने की व्यवस्था की घोषणा की है। आम जनता को अपने ही क्षेत्र में आरक्षित टिकिट मिल सके इस दृष्टि से मोबाइल वेन की व्यवस्था भी की जा रही है जिसके माध्यम से आम लोग स्टेशन पर जाये बिना भी अपनी यात्रा का आरक्षण करा सकेंगे। दूरदराज में बसे लोगों के लिए पंचायत स्तर पर भी टिकिट काऊंटर खोले जायेंगे। इस वर्ष एक हजार कि.मी. रेल लाईन बिछाने की घोषणा भी की गई है। रेल्वे में तोड़फोड़ रोकने और अपराधो पर नियंत्रण के लिए रेलमंत्री ने राज्य सरकारों को भी जिम्मेदारी सम्हालने का आव्हान किया है। उन्होंने बताया कि जी.आर.पी. पर होने वाला आधा काम रेल विभाग द्वारा राज्यों को दिया जाता है। अत: रेल्वे में पुलिस व्यवस्था में कसावट लाने में राज्यों को को भी जिम्मेदारी उठानी चाहिए। रेल में दुर्घटनारोधी उपकरण भी लगाए जायेंगे।

खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के प्रति भी रेल्वे ने अपनी भूमिका को अहम् बनाने का प्रयास किया है। रेलमंत्री ने इस दिशा में 5 स्थानों पर रेल्वे स्पोर्टस अथारिटी शुरू करने के साथ ही उत्कृष्ट खिलाड़ियों को रेलसेवा में महत्व देने की घोषणा भी की है। भूतपूर्व सैनिकों की सेवाऐं सुरक्षा कार्य में लेने की घोषणा के साथ ही महिलाओं की सुरक्षा के प्रति भी कदम उठाने की घोषणा की गई है। इसके लिए 12 महिला वाहिनी-बल बनायें जायेंगे जिनमें अल्पसंख्यक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति आदि वर्गों की महिलाओं को भी अवसर दिया जायेगा। रेल्वे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी सुधारा गया है। रेलमंत्री ने यह प्रावधान किया है कि यदि किसी की भूमि रेल्वे द्वारा अधिगृहित की जाती है तो उसके परिवार के एक सदस्य को रेल्वे में नौकरी भी दी जायगी।

पिछले रेल बजट में अधिमान्य पत्रकारों को अपने साथ एक वर्ष में एक बार अपनी पत्नी के साथ यात्रा करने की सुविधा दी गई थी। इस बजट में ममता बनर्जी ने पत्नी के साथ ही अपने बच्चों के लिए भी यात्रा रियायत देने की घोषणा की है। यात्रियों को ए.सी. और स्लीपर में लगने वाला ई-टिकिट सरचार्ज 40 रुपये से घटाकर 20 रुपये कर दिया गया है।

हालांकि वर्ष 2010-11 के रेल बजट में प्राय: सभी राज्यों को कुछ न कुछ मिला है किंतु इसके बावजूद भी अनेक ऐसे प्रस्ताव हैं जो शामिल नहीं हो पाये हैं। विपक्ष की इस पर की जा रही टिप्पणियों पर ममता बनर्जी ने स्पष्ट रूप से कहा कि सभी की अपेक्षाओं की पूर्ति करना संभव नहीं हो सकता हैं। विपक्ष की प्रतिक्रियाओं के बावजूद रेल बजट में मिले तोहफे निश्चित ही जनआंकाक्षाओं को पूरा करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास कहे जा सकते हैं। राजनीति की यह विडंबना है कि विपक्ष में रहने वाली पार्टी को सदैव ही विरोध ही प्रकट करना पड़ता है। रेल बजट पर अपनी प्रतिक्रियायें पूर्व रेलमंत्री लालूप्रसाद यादव की ये टिप्पणियों में भी यही झलक मिलती है। उन्होंने अपने समय के रेल बजट की तुलना में इस बजट को निराशाजनक बताया है और कहा है कि यह पिछले कार्यों का एक तरह से सर्वेक्षण बजट है, इसमें कुछ भी नहीं है।

कुल मिलाकर रेल बजट यात्रियों के लिए संतोष का बजट है, जबकि राजनैतिक लोगों के नजरिए के मुताबिक उन्हें यह बजट पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी आम चुनाव के परिप्रेक्ष्य में तैयार हुआ बजट लग रहा है। नई रेलगाड़ियों और नये क्षेत्रों के सर्वेक्षण की घोषणाओं ने देश में रेल्वे के विस्तार की प्रक्रिया को इस बजट से एक नई दिशा मिलती हुई दिखाई दे रही है।

राजेंद्र जोशी